झपकियां ले लेकर थक चुकी है ज़िंदगी, आंखों को नींद का सहारा चाहिए और सपनों को उसकी बाहों का....
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झपकियां ले लेकर थक चुकी है ज़िंदगी, आंखों को नींद का सहारा चाहिए और सपनों को उसकी बाहों का....
Husn ki barsaton me wo badal si banke ayii thi☁️
Sardi ki un raaton me wo chadar si banke ayii thi❣️
Pyaase ko paani mila Ana jab uska hua 😇
Sooni in ankhon me wo kajal si banke ayii thi😍
हुस्न की बरसातों में वो बादल सी बनके आयी थी☁️
सर्दी की उन रातों में वो चादर सी बनके आई थी❣️
प्यासे को पानी मिला आना जब उसका हुआ😇
सूनी इन आँखों में वो काजल बनके आयी थी😍
