Jhooth khud nu v te Khuda nu v || True punjabi poetry was last modified: December 29th, 2019 by Manjinder Bhullar
karaa pyaar tainu saaha ton v vadh ke
saath deu tera baaha di tarah
rakhugaa bnaake tainu raani raajeyaa di tarah
naal naal rahu tere parchhawe di tarah
ਕਰਾ ਪਿਆਰ ਤੈਨੂੰ ਸਾਹਾਂ ਤੋਂ ਵੀ ਵੱਧ ਕੇ
ਸਾਥ ਦਊ ਤੇਰਾ ਬਾਹਾਂ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾ
ਰੱਖੂੰਗਾ ਬਣਾਕੇ ਤੈਨੂੰ ਰਾਣੀ ਰਾਜਿਆਂ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ
ਨਾਲ ਨਾਲ ਰਹੂ ਤੇਰੇ ਪਰਛਾਵੇਂ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
तुम्हारे गुजरे पलों में बेशक मैं नहीं थी
तुम्हारे संग भविष्य की अपेक्षा भी नहीं थी
हां,वर्तमान के कुछ चंद क्षण
साझा करने की ख्वाहिश जरुर थी।
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
देखो, आज फिर उंगलियों ने मेरी
कलम उठाई है
कुछ अनसुनी भावनाओं को संग अपने
समेट लाई है
माना ,मेरे शब्दों ने आहत किया तुम्हें
लेकिन क्या,असल भाव को पहचाना तुमने?
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
उलझ गए तुम निरर्थक शब्दों में
पढ़ा नहीं जो लिखा है कोमल हृदय में
चल दिए छोड़ उसे, तुम अपनी अना में
बंधे थे हम तुम, जिस अनदेखे रिश्ते की डोर में
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
बीत गए कई बारिश के मौसम
क्या धुले नहीं, जमे धूल मन के?
है अर्जी मेरी चले आओ तुम
मेरे भीतर के तम को रोशनी दिखाओ तुम..
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।