जिन्हें मोहब्बत थी मेरी मुस्कानों से
वे आज मेरा जिस्म चाहने लगे हैं
जो चाहते थे मैं हमेशा मुस्कुराऊं
वे आज मेरी मुस्कान ही छीनने लगे हैं
Enjoy Every Movement of life!
जिन्हें मोहब्बत थी मेरी मुस्कानों से
वे आज मेरा जिस्म चाहने लगे हैं
जो चाहते थे मैं हमेशा मुस्कुराऊं
वे आज मेरी मुस्कान ही छीनने लगे हैं
डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो…..
और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया

