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Mere dost || hindi poetry on dost
मैं ना जानू दोस्त तेरे दूर हो जाने के बाद,
यह जिंदगी कैसे जंग बन गई है।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
यह गांव की गलियां कैसे सुनी हो गई है।
मैंने जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
वो खेल का मैदान अब सुना लगता है।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
कैसे फूल जैसी जिंदगी पत्थर बन गई है।
खुद को मनाने की कोशिश करता हूं बहुत,
लेकिन क्या करूं दिल है कि मानता ही नहीं।
मैं ना जानू दोस्त तेरी दूर हो जाने के बाद,
मेरे चेहरे की हंसी कहां गुम हो गई।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
बाजारों की रौनक भी फीकी लगती है।
तू कब आएगा मेरे भाई मेरे दोस्त,
तेरे को हर दिन गले लगाने का मन करता है।
Title: Mere dost || hindi poetry on dost
Gussa kar beshaq || sad punjabi shayari || true lines
Gussa kar beshaq jinna marzi
Par enna vi Na Kari ke nafrat ch badal jawe..!!
ਗੁੱਸਾ ਕਰ ਬੇਸ਼ੱਕ ਜਿੰਨਾ ਮਰਜ਼ੀ
ਪਰ ਇੰਨਾ ਵੀ ਨਾ ਕਰੀਂ ਕਿ ਨਫ਼ਰਤ ‘ਚ ਬਦਲ ਜਾਵੇ..!!

