जो लोग हमे पागल कहते थे
उनका कहना अब ठीक लगता हैं
तेरे इश्क में रहेगें ता उम्र अब
चाहे कितना भी अजीब लगता हैं
तेरे मर्जी हैं आ या नही
हम अब ऐसे ही जियेगे
हमे यही सलीका अब ठीक लगता हैं
जो लोग हमे पागल कहते थे
उनका कहना अब ठीक लगता हैं
तेरे इश्क में रहेगें ता उम्र अब
चाहे कितना भी अजीब लगता हैं
तेरे मर्जी हैं आ या नही
हम अब ऐसे ही जियेगे
हमे यही सलीका अब ठीक लगता हैं
गजल (बे बहर)
जाने क्या हो गया है कैसी इम्तिहान की घड़ी है,
एक आशिक पे ये कैसी सजा आन पड़ी है!
आस भी क्या लगाएं अबकी होली पे हम उनसे,
दुनिया की ये खोखली रस्में तलवार लिए खड़ी है!
मैंने देखें हैं गेसुओं के हंसते रुखसार पे लाली
मगर हमारे चेहरे पे फिर आंसुओं की लड़ी है!
दर्द है, हिज्र है,और धुंधली सी तस्वीर का साया भी
तुम महलों में रहते हो तुमको हमारी क्यों पड़ी है !!
कैसे मुकर जाऊं मैं खुद से किए वादों से अभी,
अब मेरे हाथों में ज़िम्मेदारियों की हथकड़ी है!
तुमको को प्यार है दौलत ए जहां से अच्छा है,
मगर इस जहान में मेरे लिए मां सबसे बड़ी है !!
Tujhse nazrein milayun kaise
Tere pass aayun kaise
Tere pyar mein to kho chuka hu bhut kuch
Ab khud ko bhool jayun kaise
Ye pyas to roz badti hi jati hai
Tujhe ehsaas mein dilayun kaise..!!
तुझसे नज़रे मिलाऊँ कैसे।
तेरे पास आऊँ कैसे।
तेरे प्यार में तो खो चुका हूँ बहुत कुछ।
अब खुद को भूल जाऊँ कैसे।
ये प्यास तो रोज बढ़ती ही जाती है।
तुझे एहसास मैं दिलाऊं कैसे..!!