ज्यादा सोचना ये एक बिमारी है और,
मन की बात कहना उसकी दवाई..
Jyada sochna ye ek bimari hai aur,
Man ki bat kahana uski dawai…
ज्यादा सोचना ये एक बिमारी है और,
मन की बात कहना उसकी दवाई..
Jyada sochna ye ek bimari hai aur,
Man ki bat kahana uski dawai…
Bhulne ni kade pal jo tere naa bataye
na chahunde hoye v sajjna supne tere hi aaye
na reha vas saaha te jis din de ne tere naal nain mlaye
ਭੁੱਲਣੇ ਨੀ ਕਦੇ ਪਲ ਜੋ ਤੇਰੇ ਨਾਂ ਬਤਾਏ
ਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋਏ ਵੀ ਸੱਜਣਾਂ ਸੁਪਨੇ ਤੇਰੇ ਹੀ ਆਏ
ਨਾ ਰਿਹਾ ਵੱਸ ਸਾਹਾ ਤੇ ਜਿਸ ਦਿਨ ਦੇ ਨੇ ਤੇਰੇ ਨਾ ਨੈਣ ਮਲਾਏ
माना तुम्हे हर बार देखता हूं,
हर बार पहली बार देखता हूं,
देखता हूं तुम्हे जब जुल्फें संवरती हो तुम,
उन जुल्फों को आइना बनके हर बार देखता हूं,
आंखो में रातें और सुर्खी में ग़ुलाब जैसे,
मेरे हाथ खाली जाम तुम्हारे होंठो में शराब जैसे,
जैसे हर बार तुम्हारा वो ख़्वाब देखता हूं,
तुम्हारे हाथों में मेरा दिया वो ग़ुलाब देखता हूं,
वक्त हो तो आना कभी इक हसरत बाकी है,
तुम्हे हर बार की तरह पहली बार देखना बाकी है...