काश ।।।।
उसे भी फर्क पड़ता
मेरे हँसने से ..
मेरे रोने से…
मेरे साथ ना होने से …
और यू इल्जाम ना लगते,मेरे जाने से।।।।
Enjoy Every Movement of life!
काश ।।।।
उसे भी फर्क पड़ता
मेरे हँसने से ..
मेरे रोने से…
मेरे साथ ना होने से …
और यू इल्जाम ना लगते,मेरे जाने से।।।।
Dusre ki amaanat ko dhekh kar hairan mat ho,
Khuda tumhe bhi dega pareshan mat ho
रात को रात, सुबह को सुबह लिखते हो
अच्छे को अच्छा बुरे को,बुरा लिखते हो
तुम्हें तो आदत है,दर्द को दर्द लिखने की
मतलब हम से बिल्कुल,जुदा लिखते हो
खुदा को तो, कभी लिखा ही नहीं तुमने
पत्थर को बना के मूरत,खुदा लिखते हो
तुम तो दुश्मनी में भी, करते हो व्यापार
बनकर हक़िम,ज़हर की दवा लिखते हो
बो तो लिख देता है,बेवफ़ाई को मज़बूरी
भैरव क्यूं बेवफ़ा को, बेवफ़ा लिखते हो