कभी तेजी रखू, सफर में कभी मैं, ढलने लगता हूं..
कभी ठहर जाऊ, एक जगह कभी बस, चलने लगता हूं..
मंजिल का अता और पता नहीं, फासला सफर का जरा बढ़ गया..
सोच कर कमाई बस, सफर की हथेलियों को, मालने लगता हूं..
कभी तेजी रखू, सफर में कभी मैं, ढलने लगता हूं..
कभी ठहर जाऊ, एक जगह कभी बस, चलने लगता हूं..
मंजिल का अता और पता नहीं, फासला सफर का जरा बढ़ गया..
सोच कर कमाई बस, सफर की हथेलियों को, मालने लगता हूं..
हर रोज़ आईने से पूछा करते हैं, बता हमारी तक़दीर में क्या है,
ये अकेलापन कभी तो हमारा साथ छोड़ेगा, हमारी ज़िंदगी में उनके साथ की रोशनी लाएगा,
हर बार आईना उदास होकर कहता है,
ये दिल-ए-नादान किसी से इस क़दर मोहब्बत न कर, कि उनके न होने से तेरा वजूद मिट जाए।
ये अकेलापन कभी तो हमारा साथ छोड़ेगा, हमारी ज़िंदगी में उनके साथ की रोशनी लाएगा,
हर बार आईना उदास होकर कहता है,
ये दिल-ए-नादान किसी से इस क़दर मोहब्बत न कर, कि उनके न होने से तेरा वजूद मिट जाए।” target=”_blank” rel=”noopener noreferrer nofolllow external”>Translate Facebook Whatsapp
Vo akasar pucha karte the humse kyu batoon ko byaan nhi karte javab agar dete to humari mohabbat par svaal uth jate
वो अक्सर पूछा करते थे हमसे क्यों बातों को बयां नही करते जवाब अगर देते तो हमारी मोहब्बत पर सवाल उठ जाते