कभी तेजी रखू, सफर में कभी मैं, ढलने लगता हूं..
कभी ठहर जाऊ, एक जगह कभी बस, चलने लगता हूं..
मंजिल का अता और पता नहीं, फासला सफर का जरा बढ़ गया..
सोच कर कमाई बस, सफर की हथेलियों को, मालने लगता हूं..
कभी तेजी रखू, सफर में कभी मैं, ढलने लगता हूं..
कभी ठहर जाऊ, एक जगह कभी बस, चलने लगता हूं..
मंजिल का अता और पता नहीं, फासला सफर का जरा बढ़ गया..
सोच कर कमाई बस, सफर की हथेलियों को, मालने लगता हूं..
Asin tan khud aapniyaan mehflan diyaan
tahniyaan chhang aaye
tel unde hoye v khushi te diwe bujaa aye
ਅਸੀਂ ਤਾਂ ਖੁਦ ਆਪਣੀਆਂ ਮਹਿਫਲਾਂ ਦੀਆਂ
ਟਾਹਣੀਆਂ ਛਾਂਗ ਆਏ
ਤੇਲ ਹੁੰਦੇ ਹੋਏ ਵੀ ਖੁਸ਼ੀ ਦੇ ਦੀਵੇ ਬੁਝਾ ਆਏ