कभी तेजी रखू, सफर में कभी मैं, ढलने लगता हूं..
कभी ठहर जाऊ, एक जगह कभी बस, चलने लगता हूं..
मंजिल का अता और पता नहीं, फासला सफर का जरा बढ़ गया..
सोच कर कमाई बस, सफर की हथेलियों को, मालने लगता हूं..
कभी तेजी रखू, सफर में कभी मैं, ढलने लगता हूं..
कभी ठहर जाऊ, एक जगह कभी बस, चलने लगता हूं..
मंजिल का अता और पता नहीं, फासला सफर का जरा बढ़ गया..
सोच कर कमाई बस, सफर की हथेलियों को, मालने लगता हूं..
choom kar kafan mein lipaten mere chehare ko.. usane tadap ke kaha,
naye kapade kya pahan lie… hamen dekhate bhi nahin..
चूम कर कफ़न में लिपटें मेरे चेहरे को.. उसने तड़प के कहा,
नए कपड़े क्या पहन लिए… हमें देखते भी नहीं..
Kine diwane suli tange tu
mat paeyaa kar soott kale rang de tu
oehla hi kehar bindi na uto laaeya kar
tere ton guzaarish tu bahar ghat jaaeyaa kar
ਕਿਨੇਂ ਦਿਵਾਨੇ ਸੁਲੀ ਟੰਗੇ ਤੂੰ
ਮੱਤ ਪਾਇਆ ਕਰ ਸ਼ੂਟ ਕਾਲ਼ੇ ਰੰਗ ਦੇ ਤੂੰ
ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਕਹੀਰ ਬਿਂਦੀ ਨਾ ਉਤੋਂ ਲਾਇਆ ਕਰ
ਤੇਰੇ ਤੋਂ ਗੁਜ਼ਾਰਿਸ਼ ਤੂੰ ਬਾਹਰ ਘੱਟ ਜਾਇਆਂ ਕਰ