
Kahda ishq tere naal ho gaya..!!

जीवन के दरिया में
एक कश्ती सा है मन
कहती हैं…
हालात की लहरें,
कि सफ़र में अभी
आज़माइश बाक़ी है!
समझाना मन को और
समझना उसे…
कि साथ है जब तक ये
हर गुंजाईश बाक़ी है।
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे तेरी मर्जी के मुताबिक नज़र आयें कैसे घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत बाद का है पहले ये तय हो की इस घर को बचाएं कैसे क़हक़हा आँख का बर्ताव बदल देता है हंसने वाले तुझे आंसू नज़र आयें कैसे कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा एक कतरे को समंदर नज़र आयें कैसे लाख तलवरे झुकी अती हो गरदन की तरफ सर झुकाना नहीं आता तो झुकाएं कैसे