कई बार ख्याल बुरे सपनों का खुद-को, जगा-कर मिटा लिया..
गर लगी चोट तो निशानों पर मरहम, लगाकर मिटा लिया..
वो दाग तो मिट गए, जिन जख्मों का असर कम था..
कुछ दर्द शराब से और कुछ को अपने शब्दों से गा कर मिटा लिया..
Enjoy Every Movement of life!
कई बार ख्याल बुरे सपनों का खुद-को, जगा-कर मिटा लिया..
गर लगी चोट तो निशानों पर मरहम, लगाकर मिटा लिया..
वो दाग तो मिट गए, जिन जख्मों का असर कम था..
कुछ दर्द शराब से और कुछ को अपने शब्दों से गा कर मिटा लिया..
Na sochiyega
Kabhi aapki fikar krenge kisi se aapka zikar krenge zikar kya juban par naam nhi ykeen maniye isse badhkar koi intkaam nhi
न सोचिएगा
कभी आप की फिक्र करेंगे किसी से आपका ज़िक्र करेंगे ज़िक्र क्या जुबां पर नाम नही यकीन मानिए इस से बढ़ कर इंतकाम नही
