कई दिनो से अपने तकिए के भिगोये नही हूं,
एक मुद्त गुझर गई जी भर के रोया नही हूं
पता नही अब वोक नींद कब मिलेगी
कई रातो से मीठे ख्वाबो मे खोया नही हुं
Enjoy Every Movement of life!
कई दिनो से अपने तकिए के भिगोये नही हूं,
एक मुद्त गुझर गई जी भर के रोया नही हूं
पता नही अब वोक नींद कब मिलेगी
कई रातो से मीठे ख्वाबो मे खोया नही हुं
Dil nu raahat te chehre te muskuraahat
tainu dekh ke hi aundi e
ਦਿਲ ਨੂੰ ਰਾਹਤ ਤੇ ਚਿਹਰੇ ਤੇ ਮੁਸਕੁਰਾਹਟ..
ਤੈਨੂੰ ਦੇਖ ਕੇ ਹੀ ਆਉਂਦੀ ਏ..
तलाश लो ये जिस्म मगर, रूह तक कैसे जाओगे,
छान लो शहर सारा मगर, दर तक कैसे जाओगे,
आओगे जब वापस तो, नज़रें झुकी होगी तुम्हारी
तड़पेगा वो जिस्म ओर तुम, गुनहगार बन जाओगे...