जो ज़ख्म देता है मरहम उसी का काम है
लोग कितना ही मरहम क्यों न लगा दे कम ही लगता है
जो ज़ख्म देता है मरहम उसी का काम है
लोग कितना ही मरहम क्यों न लगा दे कम ही लगता है
हमारा तिरंगा
देश का प्रतीक है यह,
हर हिंदुस्तानी के नज़दीक है यह।
हर डर भुला देता है,
एक जोश जगा देता है।
सूरज सा ‘नारंगी’ तेज है इसमें,
शांति का ‘सफेद’ संदेश है इसमें।
इसमे खुशिओं की ‘हरियाली’ है,
यह चक्रवर्ती ‘चक्रधारी’ है।
वो फसलों सा लहराता है,
वो हर ऊंचाई से ऊपर जाता है।
एक बच्चे सा भोला है यह,
वक़्त पड़ने पर दहकता शोला है यह।
मित्रों का मीत है यह,
हर बुराई पर जीत है यह।
जीने का अंदाज़ है यह,
अपनी माटी का एहसास है यह।
इसकी अलग ही शान है,
यह हमारा तिरंगा महान है।।
Mom se hain gir rahe armaan yun pighal ke
Angaro mein sulagh rahi kuch aag halke halke
Mausam badal rahe palkein bhiga rahe hain
Kuch lamhe beete kal ke kuch lamhe aaj kal ke
मोम से हैं गिर रहे अरमां यूं पिघल के
अंगारों में सुलग रही कुछ आग हल्के हल्के
मौसम बदल रहे पलकें भीगा रहे हैं
कुछ लम्हे बीते कल के कुछ लम्हे आज कल के