
pehle hi hamaare andar kitni bhi
khubiyaa kyu na ho
magar log nikalenge toh sirf kamiyaa

ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
…………………………………………..
गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
……………………………………………
बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
…………………………………………….
कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
………………………………………………
इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
………………………………………………….
कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
………………………………………………………
जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।
Khiyal kare je mere hasseyan te oh
Hassde chehre ki te ronde mukhde ki😇..!!
Ohnu fark pai jawe je mere hnjhuyan naal
Fir dard ki te dukhde ki😊..!!
ਖਿਆਲ ਕਰੇ ਜੇ ਮੇਰੇ ਹਾਸਿਆਂ ‘ਤੇ ਉਹ
ਹੱਸਦੇ ਚਿਹਰੇ ਕੀ ਤੇ ਰੋਂਦੇ ਮੁੱਖੜੇ ਕੀ😇..!!
ਉਹਨੂੰ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇ ਜੇ ਮੇਰੇ ਹੰਝੂਆਂ ਨਾਲ
ਫਿਰ ਦਰਦ ਕੀ ਤੇ ਦੁੱਖੜੇ ਕੀ😊..!!