Skip to content

mere taan kamjabi punjabi shayari

me and my success punjabi shayari || mere taan kamjabi

Title: mere taan kamjabi punjabi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


MAIN HAIGI AA ..! Maa || punjabi poetry

ਕਹਿੰਦੀ ਤੂੰ ਡਰਿਆ ਨਾ ਕਰ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਮੈਂ ਹੈਗੀ ਆ
ਤਪਦੀ ਧੁੱਪ ਤੇ ਵਿਚ ਦੁਪਹਿਰੇ 
ਜਲ ਗਈ ਚਮੜੀ ਤੇ ਸੁੱਖ ਗਏ ਚੇਹਰੇ
ਬੱਚੇ ਆਪਣੇ ਨੂੰ ਪਾਲਣ ਦੇ ਲਈ 
ਲੱਗੀ ਰਹੀ ਓਹ ਵਿਚ ਹਨੇਰੇ 
ਸੁੱਕ ਜਾਵੇ ਗਲ ਤੇ ਪਾਣੀ ਨਾ ਮੰਗੇ
ਲੋਕ ਵੇਖਦੇ ਰਹਿ ਗਏ ਚਾਰ ਚੁਫੇਰੇ 
ਮੂੰਹ ਦੇ ਵਿੱਚੋ ਉਫ਼ ਨਾ ਨਿਕਲੇ 
ਵੇਖ ਤਾਂ ਸਹੀ ਮੇਰੀ ਮਾਂ ਦੇ ਜੇਰੇ…
ਚਾਰੋਂ ਪਹਿਰ ਕੰਮ ਆ ਕਰਦੀ 
ਭੁੱਲ ਗਈ ਹੱਸਣਾ ਤੇ ਆਰਾਮ ਨੂੰ ਵੀ 
ਚਾਰ ਪਾਈ ਤੇ ਨਾ ਪੈ ਕੇ ਵੇਖੇ 
ਲੱਗੀ ਰਹਿੰਦੀ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਵੀ 
ਪੈਰਾਂ ਵਿਚ ਛਾਲੇ ਪੈ ਜਾਂਦੇ ਤੁਰਕੇ 
ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਗੋਦ ਚੋਂ ਲਾਹੁੰਦੀ ਨਈ 
ਨਾ ਖਾਣ ਦੀ ਫ਼ਿਕਰ ਨਾ ਸੌਣ ਦੀ 
ਓਹ ਤਾਂ ਰਾਤ ਨੂੰ ਅੱਖ ਵੀ ਲਾਉਂਦੀ ਨਈ 
ਰਾਤ ਹਨੇਰੇ ਡਰ ਜਾਵਾ ਮੈਂ
ਹਰ ਸਪਨੇ ਦੇ ਵਿਚ ਮਰ ਜਾਵਾ ਮੈਂ 
ਤੈਨੂੰ ਲੈ ਜਾਣਾ ਮੈਂ ਨਾਲ ਆਪਣੇ
ਮੌਤ ਮੈਨੂੰ ਕਹਿਗੀ ਆ 
ਮੱਥਾ ਚੁੰਮ ਮੈਨੂੰ ਮਾਂ ਮੇਰੀ ਆਖੇ ਡਰ ਨਾ ਪੁੱਤ ਮੈ ਹੈਗੀ ਆ
– ਮਾਂ ਕਿਵੇਂ ਝੁਕਾਵਾਂ ਕਰਜ ਤੇਰਾ 
ਮੈਨੂੰ ਸਮਝ ਇਹ ਆਈ ਨਾ 
ਮੈਂ ਬਣ ਜਾਣਾ ਤੇਰਾ ਸਹਾਰਾ ਮਾਂ 
ਤੂੰ ਸ਼ਰਨ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕਦੇ ਜਾਵੀਂ ਨਾ 
ਮਾਂ ਮੈਨੂੰ ਛੱਡ ਕਦੇ ਜਾਵੀਂ ਨਾ…

Title: MAIN HAIGI AA ..! Maa || punjabi poetry


Love poetry || Hindi Poems on mohobbat

देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने,
अपनी आंखों पर न किया था एतबार मैंने,
क्या होता है कोई इतना भी खूबसूरत,
यही पूछा था खुदा से बार-बार मैंने।
तेरे नीले नीले नैनो ने किया था काला जादू मुझ पर,
यूं ही तो नहीं खो दिया था करार मैंने।

कायदा इश्क जब से पड़ा है,
इल्म बस इतना बचा है मुझ में,
फकत नाम तेरा मैं लिख लेता हूं, पढ़ लेता हूं।

आग बरसे चारों तरफ इस जमाने के लिए,
मेरी आंखों की नमी में हो पनाह किसी को छिपाने के लिए।
वो है खुदगर्ज बड़ी मैं जानता हूं,
लौट आएगी फिर से खुद को बचाने के लिए।

मिजाज हो गए तल्ख जब मतलब निकल गया,
ना हुई दुआ कबूल तो मजहब बदल गया।
वो जो कहते थे कि मेरी चाहत कि खुदा तुम हो,
कभी बदली उनकी चाहत कभी खुदा बदल गया।

चल मान लिया कोई तुझसे प्यारी नहीं होगी,
पर शर्त लगा लो तुम से भी वफादारी नहीं होगी।
तेरी बेवफाई ने मेरा इलाज कर दिया है,
पक्का अब हमें फिर से इश्क की बीमारी नहीं होगी।

प्यार जब भी हुआ तुमसे ही हुआ,
कोशिश बहुत की मैंने किसी और को चाहने की।
एक तो तेरा इश्क था ही और एक मैंने आ पकड़ा,
अब कोई कोशिश भी ना करना मुझ को बचाने की।

यह जो आज हम उजड़े उजड़े फिरते हैं,
हसरतें बहुत थी हमें भी दुनिया बसाने की।
मुझे आज भी तुमसे कोई गिला नहीं है,
दस्तूर ही कहां बचा है मोहब्बत निभाने का।

इस शहर में मुर्दों की तादाद बहुत है,
कौन कहता है कि ये आबाद बहुत है,
जुल्मों के खिलाफ यहां कोई नहीं बोलता,
बाद में करते सभी बात बहुत हैं।

मेरे छोटे से इस दिल में जज्बात बहुत हैं,
नींद नहीं है आंखों में ख्वाबों की बरसात बहुत है।
राह नहीं, मंजिल नहीं, पैर नहीं कुछ भी नहीं,
मुझे चलने के लिए तेरा साथ बहुत है।

दूर होकर भी तू मेरे पास बहुत है,
सगा तो नहीं मेरी पर तू खास बहुत है।
जिनकी टूट चुकी उनको छोड़ो बस,
हमें तो आज भी उनसे आस बहुत है।

Title: Love poetry || Hindi Poems on mohobbat