dukhaa nu peena sikh gaye
akele jina sikh gaye
haashiyaa de pishe rakh
darda nu chhipauna sikh gaye
ਦੁਖਾਂ ਨੂੰ ਪੀਣਾ ਸਿੱਖ ਗਏ
ਅਕੇਲੇ ਜਿਨਾਂ ਸਿੱਖ ਗਏ
ਹਾਸ਼ੀਆ ਦੇ ਪਿੱਛੇ ਰੱਖ
ਦਰਦਾਂ ਨੂੰ ਛਿਪਾਉਣਾ ਸਿੱਖ ਗਏ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…