Agar Bikne Pe Aa Jao Toh Ghat Jate Hain Daam Aksar,
Na Bikne Ka Iraada Ho Toh Keemat Aur Barhti Hai.
अगर बिकने पे आ जाओ तो घट जाते हैं दाम अक्सर,
न बिकने का इरादा हो तो क़ीमत और बढ़ती है।
Agar Bikne Pe Aa Jao Toh Ghat Jate Hain Daam Aksar,
Na Bikne Ka Iraada Ho Toh Keemat Aur Barhti Hai.
अगर बिकने पे आ जाओ तो घट जाते हैं दाम अक्सर,
न बिकने का इरादा हो तो क़ीमत और बढ़ती है।
इस जीवन से जुड़ा एक सवाल है हमारा~
क्या हमें फिर से कभी मिलेगा ये दोबारा?
समंदर में तैरती कश्ती को मिल जाता है किनारा~
क्या हम भी पा सकेंगे अपनी लक्ष्य का किनारा?
जिस तरह पत्तों का शाखा है जीवन भर का सहारा~
क्या उसी तरह मेरा भी होगा इस जहां में कोई प्यारा?
हम एक छोटी सी उदासी से पा लेते हैं डर का अंधियारा~
गरीब कैसे सैकड़ों गालियां खा कर भी कर लेतें है गुजारा ?
जिस तरह आसमान मे रह जाते सूरज और चांद-तारा ~
क्या उस तरह रह पाएगा हमारी दोस्ती का सहारा ?
जैसे हमेशा चलती रहती है नदियों का धारा~
क्या हम भी चल सकेंगे अपनी राह की धारा ?
ਹਰ ਆਸ਼ਕਾ ਦੀ ਇਕੋਂ ਜਹੀ ਕਹਾਣੀ
ਮਹੋਬਤ ਕਰ ਬੈਠੇ ਸੀ ਸਜਣ ਨਾਲ ਰੁਹਾਨੀਂ
ਕੋਈ ਮੁੱਲ ਨਹੀਂ ਨਜ਼ਰਾਂ ਅੱਗੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਪਿਆਰ ਦਾ
ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਵੀ ਕਿਤਾ ਇਸ਼ਕ ਇਹਣਾ ਨਾਲ ਓਹਣਾ ਨੂੰ ਲੁਟਿਆ ਨਾ ਲੇਕੇ ਪਿਆਰ ਦਾ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷