Enjoy Every Movement of life!
कितने गुज़र गए ज़माने यूँ ज़ख्म खाने में,
बडा वक़्त लगाते हो यार मरहम लगाने में.
दासबर्दार तेरे इश्क़ में आशनाई गवा बैठे,
बावर्णा दिल-खवा अपने भी थे ज़माने में.
जो क़ल्ब परोसता है ग़ज़लों में बेदिली से मुसाहिब,
मुझे भी तोह सुना कोनसा ग़म है तेरे अफ़साने में.
मेरा ग़म कौन जाने मैं पौधा ही जानू हिज्र-ए-गुल,
बीस दिन लगते है अशर कली को फूल बनाने में…
kidaa haal sunaawa dil da
maadhe hoye paye haa halaat
tusu rehn do ki karna
karke bekadreyaa di baat
ਕਿਦਾਂ ਹਾਲ ਸੁਣਾਵਾਂ ਦਿਲ ਦਾ
ਮਾੜੇ ਹੋਏ ਪਏ ਹਾਂ ਹਲਾਤ
ਤੂੰਸੀ ਰੇਹਣ ਦੋ ਕਿ ਕਰਨਾਂ
ਕਰਕੇ ਬੇਕਦਰੇਆ ਦੀ ਬਾਤ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ
