KHAFA NAHI HAI AAPSE
MAGAR BEWAFA NIKLE AAP
PAGAL TO HUM THE
SAMAJDAR NIKLE AAP
– AMRUTA
KHAFA NAHI HAI AAPSE
MAGAR BEWAFA NIKLE AAP
PAGAL TO HUM THE
SAMAJDAR NIKLE AAP
– AMRUTA
Milange ik din jaroor
me poori umeed rakhi aa
baki sab tere hath ch ae
tu meri kini udeek rakhi aa
ਮਿਲਾਂਗੇ ਇਕ ਦਿਨ ਜਰੂਰ
ਮੈਂ ਪੁਰੀ ਉਮੀਦ ਰੱਖੀ ਆ
ਬਾਕੀ ਸਭ ਤੇਰੇ ਹੱਥ ਚ ਏ
ਤੂੰ ਮੇਰੀ ਕਿੰਨੀ ਉਡੀਕਾ ਰੱਖੀ ਆ
तिश्नगी थी मुलाक़ात की,
उस से हाँ मैंने फिर बात की।
दुश्मनी मेरी अब मौत से,
ज़िंदगी हाथ पे हाथ की।
सादगी उसकी देखा हूँ मैं,
हाँ वो लड़की है देहात की।
तुमने वादा किया था कभी,
याद है बात वो रात की।
अब मैं कैसे कहूँ इश्क़ इसे,
बात जब आ गई ज़ात की।
मुझसे क्या दुश्मनी ऐ घटा,
क्यों मेरे घर पे बरसात की।
हमको मालिक ने जितना दिया,
सब ग़रीबों में ख़ैरात की।
तू कभी मिल तो मालूम हो,
क्या है औक़ात औक़ात की।