Zaroori nahi ke jajhbaat kalam naal hi likhe jaan
khali panne v bahut byaan kar jande ne
ਜ਼ਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ਕਿ ਜਜਬਾਤ ਕਲਮ ਨਾਲ ਹੀ ਲਿਖੇ ਜਾਣ,
ਖਾਲੀ ਪੰਨੇ ਵੀ ਬਹੁਤ ਕੁਝ ਬਿਆਨ ਕਰ ਜਾਂਦੇ ਨੇਂ
Zaroori nahi ke jajhbaat kalam naal hi likhe jaan
khali panne v bahut byaan kar jande ne
ਜ਼ਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ਕਿ ਜਜਬਾਤ ਕਲਮ ਨਾਲ ਹੀ ਲਿਖੇ ਜਾਣ,
ਖਾਲੀ ਪੰਨੇ ਵੀ ਬਹੁਤ ਕੁਝ ਬਿਆਨ ਕਰ ਜਾਂਦੇ ਨੇਂ
Na jane kis tabeeb se dawa lete ho Mursad ,
ki sirf hamse hi parhez hai tumko💔
न जाने किस तबीब से दवा लेते हो मुर्शीद,
कि सिर्फ हमसे ही परहेज़ है तुमको💔
रूप था उसका बहुत विशाल, राक्षस था वो बहुत भारी..
नाम था दशानन उसका, बुद्धि न जिसकी किसी से हारी..
हर कोई डरता था उससे, हो देव, दैत्य, चाहे नर-नारी..
प्रकोप था जिसका लोकों में, धरती कांपती थी सारी..
देखके ताकत को उसकी, भागे खड़े पैर बड़े बाल-धारी..
विशाल साम्राज्य पर उसके, भारी पड़ गई बस एक नारी..
घमंड को उसके चूर कर दिया, कहा समझ ना तू निर्बल नारी..
विधवंश का तेरे समय आ गया, ले आ गयी देख तेरी बारी..
लंका में बचेगा ना जीव कोई, मति जो गई तेरी मारी..
आराध्य से मेरे दूर कर दिया, भुगतेगी तेरी पीढी सारी..
रघुनंदन आए कर सागर पार, आए संग वानर गदा धारी..
एक-एक कर सबको मोक्ष दिया, सियाराम चरण लागी दुनिया सारी..