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Khawahish meri || ख़्वाहिश मेरी

ख्वाहिश मेरी
तुझसे तुझको पाने की
जैसे राधा को आस कृष्ण
के आने की 

BESHANTI

Title: Khawahish meri || ख़्वाहिश मेरी

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Mujhse Baat tum kiya karo

मुझसे बात तुम किया करो क्योंकि

मैं अब किसी से बात नहीं करता

मेरे दिल की बात तुम सुना करो

क्योंकि मैं अब किसी की नहीं सुनता

मुझे वक्त तुम दिया करो क्योंकि

मैं अब किसी को वक्त नहीं देता

मुझसे मुलाकात तुम किया करो

क्योंकि मैं अब किसी से नहीं मिलता

~ साहिल…!!

Title: Mujhse Baat tum kiya karo


Camel ki gardan || akbar birbal kahani

अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?

एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?

बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”

तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।

और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।

Title: Camel ki gardan || akbar birbal kahani