ख्वाहिश मेरी
तुझसे तुझको पाने की
जैसे राधा को आस कृष्ण
के आने की
BESHANTI
Enjoy Every Movement of life!
ख्वाहिश मेरी
तुझसे तुझको पाने की
जैसे राधा को आस कृष्ण
के आने की
BESHANTI
कभी तेजी रखू, सफर में कभी मैं, ढलने लगता हूं..
कभी ठहर जाऊ, एक जगह कभी बस, चलने लगता हूं..
मंजिल का अता और पता नहीं, फासला सफर का जरा बढ़ गया..
सोच कर कमाई बस, सफर की हथेलियों को, मालने लगता हूं..
