ख्वाहिश मेरी
तुझसे तुझको पाने की
जैसे राधा को आस कृष्ण
के आने की
BESHANTI
Enjoy Every Movement of life!
ख्वाहिश मेरी
तुझसे तुझको पाने की
जैसे राधा को आस कृष्ण
के आने की
BESHANTI
मंजिल तो मिल ही जाएगी भटकते ही सही
गुमराह तो वो है जो घर से निकले ही नहीं
नींद बेचैनी से कटती रही
ख्वाब कोहरे मे छुपती रही
तेरी आवाज़ से मैं अनसुनी रही
तु मिला न कही मंज़िलों पे
मैं भटकती भटकती
तुझे ढूंढती रही
तेरा मेरा रिश्ता इन
काग़ज़ों पे खत्म हो गया
साथ तेरा मेरा युं सिमट सा गया
जैसे चार दिवारी में बंध सा गया
तेरी बातों को मैं याद करता
तेरी हँसी को मैं याद करता
हमारे उन्ही हसीन पलो को
हररोज सजाया करता