usane mahaboob hee to badala hai phir taajjub kaisa,
dua kabool na ho to log khuda tak badal lete hai..
उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा,
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है..
usane mahaboob hee to badala hai phir taajjub kaisa,
dua kabool na ho to log khuda tak badal lete hai..
उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा,
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है..
तलाश लो ये जिस्म मगर, रूह तक कैसे जाओगे,
छान लो शहर सारा मगर, दर तक कैसे जाओगे,
आओगे जब वापस तो, नज़रें झुकी होगी तुम्हारी
तड़पेगा वो जिस्म ओर तुम, गुनहगार बन जाओगे...
Kyu sab sahi hai fir bhi sahi nahi ..
raat bhi h sath bhi h phir bhi vo baat nhi …
Kami bhi hai par kami kuch bhi nahi😶
क्यों सभ सही है फिर भी सही नहीं
रात भी है साथ भी है फिर भी वो बात नहीं
कमी भी है पर कमी कुछ भी नहीं😶