हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..
tere noor ne ishq de raaha nu roshnayea
tere naina ne taa saanu kagaz kalam fadhaeya
ਤੇਰੇ ਨੂਰ ਨੇ ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਰਾਹਾਂ ਨੂੰ ਰੋਸ਼ਨਾਇਆ..
ਤੇਰੇ ਨੈਣਾਂ ਨੇ ਤਾਂ ਸਾਨੂੰ ਕਾਗਜ਼ ਕਲਮ ਫੜਾਇਆ 😇❤️