
Maapeyan bin na koi naam lai hove
kidre nilami howe sath nibhaun wali
Prava te yaara bin na kuch keh hove

आ भर लूं तुझे आंखों के प्यालों में,
कहीं और जाने दूं तो कैसे...
कोशिशें तो करता हूं हरपल,
आंखो में नमी आने दूं तो कैसे...
वो दौर भी इश्क़ का आकर
गुज़र गया इक लम्हा हो जैसे...
सिमट जाऊंगा सुलगती चंद लकड़ियों में
पर तेरे कानों तक ये बात जाने दूं तो कैसे...
में तोड़ लेता अगर तू गुलाब होती
में जवाब बनता अगर तू सवाल होती
सब जानते है में नशा नहीं करता
मगर में पी लेता अगर तू शराब होती
Mein tod leta agar tu Gulab hoti
Mein jabaab deta agar tu Sawal hoti
Sab jante hai mein Nasha nahi karta
Magar mein pii leta agar tu Sharab hoti…