हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..
Mohabbat ho gayi hai shayad
Mai firse chaand ko pane chala hu
Bhut roya tha ek bar jo krke
Wahi galti firse dohrane chala hu🍂
मोहोब्बत हो गई है शायद
मैं फिर से चाँद को पाने चला हूँ
बहुत रोया था एक बार जो करके
वही गलती फिर से दोहराने चला हूँ🍂