Enjoy Every Movement of life!
उठे थे हाथ जिनके,
उन्ही दुआओं का असर हूं,
चिराग़ सी हैं नज़रें मेरी
जैसे सुबह की पहली पहर हूं
धूल से ही तो नाता है मेरा
वहीं ठंडी हवाओं में बसर हूं
कलम से शायर कह दो
होंठों से कहर हूं,
ठहरा है दरिया जो किनारे में
वहीं बहता छोटा सा शहर हूं,
मानों तो प्यास मिले
ना मानों तो ज़हर हूं...
Labh labh ke cheeza vapas kitiya vichdan vele par
Kuj mein ohde ch kuj oh mere ch reh hi gya 💔💯
ਲੱਭ ਲੱਭ ਕੇ ਚੀਜ਼ਾਂ ਵਾਪਸ ਕੀਤੀਆਂ ਵਿੱਛੜਨ ਵੇਲੇ ਪਰ
ਕੁਝ ਮੈਂ ਉਹਦੇ ਚ ਕੁਝ ਓੁਹ ਮੇਰੇ ਚ ਰਹਿ ਹੀ ਗਿਆ💔💯
