क्यों किसा मोहब्बत का यह खोला जाये
किताबें इश्क की यह बंद ही अच्छी लगती हैं
अब याद करके उन्हें आंसू क्यों ग्वाय हम
हमें यह जुदाई हीं अब अच्छी लगती हैं
—गुरू गाबा 🌷
क्यों किसा मोहब्बत का यह खोला जाये
किताबें इश्क की यह बंद ही अच्छी लगती हैं
अब याद करके उन्हें आंसू क्यों ग्वाय हम
हमें यह जुदाई हीं अब अच्छी लगती हैं
—गुरू गाबा 🌷
कभी थकन के असर का पता नहीं चलता
वो साथ हो तो सफ़र का पता नहीं चलता
वही हुआ कि मैं आँखों में उसकी डूब गया
वो कह रहा था भँवर का पता नहीं चलता
उलझ के रह गया सैलाब कुर्रए-दिल से
नहीं तो दीदा-ए-तर का पता नहीं चलता
उसे भी खिड़कियाँ खोले ज़माना बीत गया
मुझे भी शामो-सहर का पता नहीं चलता
ये मंसबो का इलाक़ा है इसलिए शायद
किसी के नाम से घर का पता नहीं चलता
Menu tere jeha tu iklota hi e
Ikk tu rahe kol nahio lod sab di..!!
Tere jeha yaar milaya ohne reham kar k
Khide mathe sawikar kara daat rabb di..!!
ਮੈਨੂੰ ਤੇਰੇ ਜਿਹਾ ਤੂੰ ਇਕਲੌਤਾ ਹੀ ਏ
ਇੱਕ ਤੂੰ ਰਹੇ ਕੋਲ ਨਹੀਂਓ ਲੋੜ ਸਭ ਦੀ..!!
ਤੇਰੇ ਜਿਹਾ ਯਾਰ ਮਿਲਾਇਆ ਓਹਨੇ ਰਹਿਮ ਕਰ ਕੇ
ਖਿੜੇ ਮੱਥੇ ਸਵੀਕਾਰ ਕਰਾਂ ਦਾਤ ਰੱਬ ਦੀ..!!