क्यों किसा मोहब्बत का यह खोला जाये
किताबें इश्क की यह बंद ही अच्छी लगती हैं
अब याद करके उन्हें आंसू क्यों ग्वाय हम
हमें यह जुदाई हीं अब अच्छी लगती हैं
—गुरू गाबा 🌷
क्यों किसा मोहब्बत का यह खोला जाये
किताबें इश्क की यह बंद ही अच्छी लगती हैं
अब याद करके उन्हें आंसू क्यों ग्वाय हम
हमें यह जुदाई हीं अब अच्छी लगती हैं
—गुरू गाबा 🌷
jande ni kimat bekar kehnde ne
aashq aashqi ch baraad rehnde ne
jande hoye v laa lainde aa yaari
jis rishte ch apna bnaa marde aa
ohnu hi pyaar kehnde ne
ਜਾਂਣਦੇ ਨੀ ਕਿਮਤ ਬੇਕਾਰ ਕਹਿੰਦੇ ਨੇ
ਆਸ਼ਕ ਆਸ਼ਕੀ ਚ ਬਰਬਾਦ ਰਹਿੰਦੇ ਨੇ
ਜਾਂਣਦੇ ਹੋਏ ਵੀ ਲਾ ਲੈਂਦੇ ਆ ਯਾਰੀ
ਜਿਸ ਰਿਸ਼ਤੇ ਚ ਆਪਣਾਂ ਬਣਾ ਮਾਰਦੇ ਆ
ਓਹਨੂੰ ਹੀ ਪਿਆਰ ਕਹਿੰਦੇ ਨੇ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
कॉलेज तक हम पर ना पढ़ाई की जिम्मेदारी रहती है , और उसके बाद घर की जिम्मेदारी आ जाती है । अपने सपनो को रख कर एक तरफ , अपनो के सपनो को पूरा करने की जिम्मेदारी आती है । क्या करे कोई अगर लाखो की भीड़ में एक शख्स अच्छा लगे , तो उसे भी ठुकराना पड़ता है । प्यार व्यार सब अच्छा नही यही बताकर दिल को अपने मनाना पड़ता है , कभी पढ़ाई की तो कभी घर की जिम्मेदारी से दिल उदास भी हो तो सामने रह कर सबके चेहरे से तो मुस्कुराना पड़ता है । हर किसी को परेशानी अपनी खुद ही पता होती है , वरना दूसरो को खुश चेहरा ही दिखता है । खुद के अलावा किसी को क्या पता की कोन रोज यहां कितनी मुश्किलों में उलझता सा है , छोटा मोटा काम करके घर का खर्चा निकालना होता है । कभी कभी नौबत ऐसी आती है की दस या पंद्रह हजार में , महीना सारा संभालना पड़ता है । यहां से वहा से ले लेकर बच्चो की ख्वाईशे भी पूरी करनी पड़ती है , कोई साथ नही देता यार यहां जिंदगी की ये लड़ाई खुद ही लड़नी पड़ती है ।