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कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढता हुआ
कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढता हुआ
अफ़्लाक से आता है नालों का जवाब आख़िर
करते हैं ख़िताब आख़िर उठते हैं हिजाब आख़िर
करते हैं ख़िताब आख़िर उठते हैं हिजाब आख़िर
Ham fakeero se kya puchhte ho dastan-e-mohabbat❣️
Hm to bewafao ko bhi jeene ki dua dete hai🙂
हम फकीरों से क्या पूछते हो दास्तां-ए-मोहोब्बत❣️
हम तो बेवफ़ाओं को भी जीने की दुआ देते हैं🙂
Chand ko dekha hai mei ne gaur se
Mohobbat ko mahsoos kiya hai mei ne qareeb se
Ahsaas to bahut kuch huwa
Par pyar kya hota aaj woh bhi seekh gae aapse❤
चांद को देखा है मैने गौर से
मोहोब्बत को महसूस किया है मैने करीब से
एहसास तो बहुत कुछ हुआ
पर प्यार क्या होता आज वो भी सीख गए आपसे❤