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कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढता हुआ
कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढता हुआ
अफ़्लाक से आता है नालों का जवाब आख़िर
करते हैं ख़िताब आख़िर उठते हैं हिजाब आख़िर
करते हैं ख़िताब आख़िर उठते हैं हिजाब आख़िर
Enjoy Every Movement of life!
जा रहा हूं जिंदगी से अब न लौट के आऊंगा
न कोई चिराग अब जलाऊंगा,न कोई अंधेरा मिटाऊंगा
जो रह गई याद तो उसे नदियों में बहाऊंगा
जो मिल गए राहों में तो रस्ता बदल जाऊंगा
बांधा था जिस रिश्ते से वो रिश्ता तोड़ जाऊंगा
नीर भरे नयनों में एक तड़प छोड़ जाऊंगा
कीचड़ ही सही एक दिन कमल बन खिल जाऊंगा
जा रहा हूं जिंदगी से अब न लौट के आऊंगा
