
Koi ja ke dasse ohna nu ke sade badlan di vajah vi oh hi ne..!!

Kaash kade ta tadap meri mehsus ohnu hundi
Ohne zehan ch vi mere layi pyar aaya hunda..!!
Kde ta oh parh paunda chehre di khamoshi nu
Kaash rondeya nu kade ohne gal laya hunda..!!
ਕਾਸ਼ ਕਦੇ ਤਾਂ ਤੜਪ ਮੇਰੀ ਮਹਿਸੂਸ ਓਹਨੂੰ ਹੁੰਦੀ
ਓਹਦੇ ਜ਼ਹਿਨ ‘ਚ ਵੀ ਮੇਰੇ ਲਈ ਪਿਆਰ ਆਇਆ ਹੁੰਦਾ..!!
ਕਦੇ ਤਾਂ ਉਹ ਪੜ੍ਹ ਪਾਉਂਦਾ ਚਿਹਰੇ ਦੀ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਨੂੰ
ਕਾਸ਼ ਰੋਂਦਿਆਂ ਨੂੰ ਕਦੇ ਉਹਨੇ ਗਲ ਲਾਇਆ ਹੁੰਦਾ..!!
लिखता मैं किसान के लिए
मैं लिखता इंसान के लिए
नहीं लिखता धनवान के लिए
नहीं लिखता मैं भगवान के लिए
लिखता खेत खलियान के लिए
लिखता मैं किसान के लिए
नहीं लिखता उद्योगों के लिए
नहीं लिखता ऊँचे मकान के लिए
लिखता हूँ सड़कों के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
क़लम मेरी बदलाव बड़े नहीं लाई
नहीं उम्मीद इसकी मुझे
खेत खलियान में बीज ये बो दे
सड़क का एक गढ्ढा भर देती
ये काफ़ी इंसान के लिए
लिखता हूँ किसान के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
आशा नहीं मुझे जगत पढ़े
पर जगत का एक पथिक पढ़े
फिर लाए क्रांति इस समाज के लिए
इसलिए लिखता मैं दबे-कुचलों के लिए
पिछड़े भारत से ज़्यादा
भूखे भारत से डरता हूँ
फिर हरित क्रांति पर लिखता हूँ
फिर किसान पर लिखता हूँ
क्योंकि
लिखता मैं किसान के लिए
लिखता मै इंसान के लिए