Kade shudaai bane tere gama ch
Kade ikalla beh muskawe..!!
Dil nu lagge marz pyar de
Dass kon samjhawe..!!
ਕਦੇ ਸ਼ੁਦਾਈ ਬਣੇ ਤੇਰੇ ਗ਼ਮਾਂ ‘ਚ
ਕਦੇ ਇਕੱਲਾ ਬਹਿ ਮੁਸਕਾਵੇ..!!
ਦਿਲ ਨੂੰ ਲੱਗੇ ਮਰਜ਼ ਪਿਆਰ ਦੇ
ਦੱਸ ਕੌਣ ਸਮਝਾਵੇ..!!
Kade shudaai bane tere gama ch
Kade ikalla beh muskawe..!!
Dil nu lagge marz pyar de
Dass kon samjhawe..!!
ਕਦੇ ਸ਼ੁਦਾਈ ਬਣੇ ਤੇਰੇ ਗ਼ਮਾਂ ‘ਚ
ਕਦੇ ਇਕੱਲਾ ਬਹਿ ਮੁਸਕਾਵੇ..!!
ਦਿਲ ਨੂੰ ਲੱਗੇ ਮਰਜ਼ ਪਿਆਰ ਦੇ
ਦੱਸ ਕੌਣ ਸਮਝਾਵੇ..!!
अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?
एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”
तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।
Jo ho riha o hona Zaruri c
Banda na v att chuki puri c
Apnea nu ki samjna
Banda na kudrat to pai durri c
Manisha❤️Mann✍️