kuchh khaas nahin in haathon kee lakeeron mein,
magar tum ho to ek lakeer hee kaaphee hai…
कुछ खास नहीं इन हाथों की लकीरों में,
मगर तुम हो तो एक लकीर ही काफी है…
kuchh khaas nahin in haathon kee lakeeron mein,
magar tum ho to ek lakeer hee kaaphee hai…
कुछ खास नहीं इन हाथों की लकीरों में,
मगर तुम हो तो एक लकीर ही काफी है…
वो मेरे चर्चे गुफ्तगू के बहाने से सबसे करते हैं,
ये जान के भी हम इस बात से हर पल मरते हैं,
जिन अपनो को के लिए सीने में मोहब्बत थी,
उनके अब हम पास गुजरने से भी बहुत डरते हैं,
मुझे कैद करके कितना जीने दे सकोगे तुम भला,
देखो कितनी शिद्दत से हम मौत की दुआ पढ़ते हैं,
मेरी जान को गुनाहों से तौल कर क्या पा लोगे,
मेरे हर्फ़ के वजन से गुनाह अक्सर बदलते हैं ,
उर्दू का कोई शायर होता मैं लफ्ज़ संभाल लेता,
गोया अगर होते तो लफ्ज़ न गिरते, न इतना संभलते।
ਮੈਂ ਜਜ਼ਬਾਤਾਂ ਨਾਲ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਜੋੜ ਲਿਆ
ਅਫ਼ਸੋਸ ਜੇ ਤੇਰੀ ਅੱਖਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਪਿਆਰ ਨੂੰ ਪੜ੍ਹ ਲੈਂਦਾ
ਗੁੱਸਾ ਬਹੁਤ ਚੀਜ਼ਾਂ ਮੇਰੇ ਲਈ ਖ਼ਰਾਬ ਕਰ ਗਿਆ
ਖੱਤਰੀ ਨੂੰ ਹਰ ਵਕਤ ਯਾਦਾਂ ਦਾ ਵਾਪਰੋਲਾ ਤੜਫਾਉਂਦਾ
𝕂ℍ𝔸𝕋ℝ𝕀♠