
Udaas haan par tere naal naraaz nahi
je jhooth kahan taan sabh kujh hai mere kol
par sach taan eh hai ke tere bin
mere kol kujh khaas nahi

Udaas haan par tere naal naraaz nahi
je jhooth kahan taan sabh kujh hai mere kol
par sach taan eh hai ke tere bin
mere kol kujh khaas nahi
दिवाली पर पापा को बोनस मिलता था तनख्वाह थोड़ी ज्यादा आती थी सबको मालूम था दिवाली पर भी नए कपड़े लेने के लिए पैसे गिनकर मिलते थे कोई अगर बीमार हो जाए तो वो नए कपड़े भी कैंसल हो जाते थे। बचपन से ही एडजस्ट करने की आदत लग जाती है ये आदत अच्छी हो होती है पर कभी कभी बुरी भी होती है। धीरे धीरे बड़े हुए तो पता था मम्मी पापा को कुछ बनकर दिखाना है ये ख्वाब साथ लेकर चला पर बाहर निकले घर से तो ये पता चला कि जो मेरा ख्वाब है वही सबका भी ख्वाब था सबको अपनी जिंदगी में मेरी तरह ही कुछ करना था। जैसे तैसे एक नौकरी लगी वो भी मेरी पसंद की नही थी पर पापा का हाथ बंटाने के लिए भी तो कुछ करना था अपने दिल को समझकर वो नौकरी कर ली मुझे नौकरी लगी ये सुनकर मम्मी पापा दोनो खुश हो जाए पापा की आखों से तो आंसू ही आ गए आंखो से निकलते आंसू भी उस दिन मुझसे बात कर रहे थे मानो वो ये कह रहे थे की अब मेरे कंधो का थोड़ा बोझ कम हुआ मेरे साथ कोई कमाने वाला आ गया। उस दिन से मैंने वो नौकरी ज्वाइन कर ली और उसकी भी आदत सी पड़ गई।
Rula kise nu umran handawi na..!!
Dhuron todan da paap tu kamawi na..!!
Rabb vi maaf na karega ese kamma nu tere
Dil kise da tu paagla dukhawi nu..!!
ਰੁਲਾ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਉਮਰਾਂ ਹੰਢਾਵੀਂ ਨਾ..!!
ਧੁਰੋਂ ਤੋੜਨ ਦਾ ਪਾਪ ਤੂੰ ਕਮਾਵੀਂ ਨਾ..!!
ਰੱਬ ਵੀ ਮਾਫ਼ ਨਾ ਕਰੇਗਾ ਐਸੇ ਕੰਮਾਂ ਨੂੰ ਤੇਰੇ
ਦਿਲ ਕਿਸੇ ਦਾ ਤੂੰ ਪਾਗਲਾ ਦੁਖਾਵੀਂ ਨਾ..!!