कुछ यादो को याद करने को संभाला हैं
तेरे खतों को जलाने को संभाला है
जहा हैं वही रह नजर न आ
हमने अपने दिल को बड़ी मुश्किल से संभाला है
कुछ यादो को याद करने को संभाला हैं
तेरे खतों को जलाने को संभाला है
जहा हैं वही रह नजर न आ
हमने अपने दिल को बड़ी मुश्किल से संभाला है
Safar wahi tak yaha tum ho,
Nazar wahi tak yaha tak tum ho,
Vese to hazaron phool khilte hain gulshan mein magar,
Khushboo vahi takk yaha tak tum ho 💕
सफर वही तक जहाँ तक तुम हो,
नज़र वही तक जहाँ तक तुम हो,
वैसे तो हज़ारों फूल खिलतें हैं गुलशन में मगर,
खुशबू वही तक जहाँ तक तुम हो।💕
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी