Saadhi aapni saukini badhi athri
tu jeb vich rakh apni taur nu
saanu apna style badha jachda
kyu follow karaan kise hor nu
ਸਾਡੀ ਅਾਪਣੀ ਸ਼ਕੀਨੀ ਬੜੀ ਅੱਥਰੀ
ਤੂੰ ਜੇਬ ਵਿਚ ਰੱਖ ਅਾਪਣੀ ਟੋਰ ਨੂੰ ..
ਸਾਨੂੰ ਅਾਪਣਾ ਸਟਾੲੀਲ ਬੜਾ ਜੱਚਦਾ ੲੇ
ਕਿੳੁ follow ਕਰਾਂ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਨੂੰ.
Saadhi aapni saukini badhi athri
tu jeb vich rakh apni taur nu
saanu apna style badha jachda
kyu follow karaan kise hor nu
ਸਾਡੀ ਅਾਪਣੀ ਸ਼ਕੀਨੀ ਬੜੀ ਅੱਥਰੀ
ਤੂੰ ਜੇਬ ਵਿਚ ਰੱਖ ਅਾਪਣੀ ਟੋਰ ਨੂੰ ..
ਸਾਨੂੰ ਅਾਪਣਾ ਸਟਾੲੀਲ ਬੜਾ ਜੱਚਦਾ ੲੇ
ਕਿੳੁ follow ਕਰਾਂ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਨੂੰ.
दिल के दर्द का एहसास तब हुआ जब हमारी परछाईं भी हमसे रूठ गई,
अँधेरे से लगता था डर और अब इस अँधेरे से जैसे यारी हो गई,
धड़कनों की तड़प अब बन गई है इस दिल की एक लोरी,
अब न किसी खुशी का इंतज़ार है, न कोई उम्मीद, हमें तो दर्द से मोहब्बत हो गई।
अँधेरे से लगता था डर और अब इस अँधेरे से जैसे यारी हो गई,
धड़कनों की तड़प अब बन गई है इस दिल की एक लोरी,
अब न किसी खुशी का इंतज़ार है, न कोई उम्मीद, हमें तो दर्द से मोहब्बत हो गई।
” target=”_blank” rel=”noopener noreferrer nofolllow external”>Translate Facebook Whatsapp
बादशाह अकबर और बीरबल शिकार पर गए हुए थे। उनके साथ कुछ सैनिक तथा सेवक भी थे। शिकार से लौटते समय एक गांव से गुजरते हुए बादशाह अकबर ने उस गांव के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होंने इस बारे में बीरबल से कहा तो उसने जवाब दिया—”हुजूर, मैं तो इस गांव के बारे में कुछ नहीं जानता, किंतु इसी गांव के किसी बाशिन्दे से पूछकर बताता हूं।”
बीरबल ने एक आदमी को बुलाकर पूछा—”क्यों भई, इस गांव में सब ठीक-ठाक तो है न?”
उस आदमी ने बादशाह को पहचान लिया और बोला—”हुजूर आपके राज में कोई कमी कैसे हो सकती है।”
“तुम्हारा नाम क्या है?” बादशाह ने पूछा।
“गंगा”
“तुम्हारे पिता का नाम?”
“जमुना”
“और मां का नाम सरस्वती है?”
“हुजूर, नर्मदा।”
यह सुनकर बीरबल ने चुटकी ली और बोला—”हुजूर तुरन्त पीछे हट जाइए। यदि आपके पास नाव हो तभी आगे बढ़ें वरना नदियों के इस गांव में तो डूब जाने का खतरा है।”
यह सुनकर बादशाह अकबर हंसे बगैर न रह सके।