लहू का रंग एक है
अमीर क्या गरीब क्या…
बने है एक खाकसे
तो दूर क्या करीब क्या…
गरीब है तो इसलिए के तुम अमीर हो गये….
एक बादशाह हुआ तो सौ फकीर हो गये…
Esa gurha rang chadeya e mohobbat da hun
Na sath shaddeya Jana e
Na dil cho kadeya Jana e
Na piche hateya Jana e..!!
ਐਸਾ ਗੂੜ੍ਹਾ ਰੰਗ ਚੜ੍ਹਿਆ ਏ ਮੋਹੁੱਬਤ ਦਾ ਹੁਣ
ਨਾ ਸਾਥ ਛੱਡਿਆ ਜਾਣਾ ਏ..!!
ਨਾ ਦਿਲ ਚੋਂ ਕੱਢਿਆ ਜਾਣਾ ਏ..!!
ਨਾ ਪਿੱਛੇ ਹਟਿਆ ਜਾਣਾ ਏ..!!
उनके चेहरे की हंसी पर नजर मेरी तब पड़ी, जब शहर में मेरा आना हुआ..
अब उनके चेहरे पर ही रहती है ये हर घड़ी, और उनका मुझे देख शर्माना हुआ..
मेरी नज़रों पे उनकी नज़रों ने लगाई ऐसी हथ-कडी, ना फिर मेरा कभी घर जाना हुआ..
अब नज़रों से सिर्फ वही देखते हैं, जो वो दिखाती है, ना जाने भरा ये हमने, कैसा हर-ज़ाना हुआ..