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Shayari | Latest Shayari on Hindi, Punjabi and English

पेड़ों के महत्व पर कविता || Hindi poetry

अंकुर मिट्टी में सोया था सपने मै खोया था
नन्हा बीज हवा ने लाकर एक जगह बोया था।

तभी बीज ने ली अंगड़ाई देह जरा सी पाई
आंख खोलकर बाहर आया, दुनिया पड़ी दिखाई

खाद्य मिली पानी भी पाया ऐसे जीवन आया
ऊपर बड़ा इधर, धरती में नीचे उधर समाया।

तने डालिया पत्ते आए और फल मुस्कराए
नन्हा बीज वृक्ष बनकर धरती पर लहराए।

जीता मरता रोगी होता दुख आने पर सोता
वृक्ष सांस लेता बढ़ता है जगता है फिर सोता।

रोज शाम को चिड़िया आती सारी रात बिताती
बड़े सवेरे जाग वृक्ष, पर ची ची ची ची गाती।

छाया आती बड़ी सुआती सब टोली झूट जाती
तरह तरह के खेल वर्क्ष के नीचे बैठ रचती।

पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ || Hindi poetry

पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ,
हरा भरा जीवन बनाओ।

छाया ये हमको देते है,
फल ये हमको देते है।

बाढ़ से हमको बचाते है,
प्रदुषण दूर हटाते हैं,

हम भी पेड़ लगाएंगे,
संसार को हरा भरा बनाएंगे।

aapse juda hona || hindi love shayari

Na taro ki mehfil na nadi ka kinara…
aapka dil❣️ ho bas aashiyana hamara…
sab gva kar bhi pa lenge aapko…
par aapse judaa hona nhi h gvaraa  aa🥰

तारों की महफिल न नदी का कनारा
आ स आशियाना हमारा
सबगवा कर भी पा लेंगे आपको
प आप से जुदा होना नही हमे गवारा 🥰

Muhabbat ka Dard

Zindagi Se badi Koi saza hi nahi ….
Mera jurm kya hai mujhe pata hi nahi …
Mai itne hisson me bant chuka hu …
Ke mere Hisse me Kuch bacha hi nahi …

जिंदगी  से बड़ी कोई  सजा ही नही …

मेरा जुर्म क्या है मुझे पता ही नही …

मैं इतने हिस्सों में बंट चुका हूं  ….

के मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं ….Zindagi Se badi Koi saza hi nahi .... || dard bhari shayari


दिल की बात || dosti bachaane me

मै ता उम्र इस गम के साथ रह गया

तुझे दिल की बात नही बताई

मै दोस्ती बचाने में रह गया

और तू आंखे नही पढ़ पाई

Hamara dil dukhane ke liye || 2 lines shayari sad

ना जाने कितनी बार हारे थे

तुम्हे जिताने के लिए

तुमने एक बार भी नही सोचा 

हमारा दिल दुखाने के लिए

अधुरी कहानी || kush baate tumhari

कुछ बाते तुम्हारी हमारी होती

पूरी अगर कहानी हमारी होती

लोग देते मिसाल और खाते कसमे

अगर तुमने बात मानी हमारी होती

Roya hoga dil || sad shayari

कितने जोरो से रोया होगा दिल

भरा बैठा था जो मुद्दत से

तुमने तो बस आने से इंकार किया था

इधर मरने चले थे हम फुरसत से