अब बस लिख के मिटा हम देते हैं, अपने ही शब्दों के जाल को..
क्यूंकि अब डायरी भी समझ नहीं पाती है, मेरे मन में चलते ख्याल को..
अब पन्ने भी मेरी कलम की स्याही से, बस दूर सा होना चाहते हैं..
अब बताएं भी तो आखिर किसे बताएं, अपने इस बिगडते हाल को..
अब बस लिख के मिटा हम देते हैं, अपने ही शब्दों के जाल को..
क्यूंकि अब डायरी भी समझ नहीं पाती है, मेरे मन में चलते ख्याल को..
अब पन्ने भी मेरी कलम की स्याही से, बस दूर सा होना चाहते हैं..
अब बताएं भी तो आखिर किसे बताएं, अपने इस बिगडते हाल को..
Pyar de kosh ch “mein” nhi hundi
Jithe “mein” howe othe pyar nhi hunda..!!
ਪਿਆਰ ਦੇ ਕੋਸ਼ ‘ਚ “ਮੈਂ” ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ
ਜਿੱਥੇ “ਮੈਂ” ਹੋਵੇ ਉੱਥੇ ਪਿਆਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ..!!
Tere kol mere jehe beshakk lakhan honge
Par mere kol tere jeha tu hi e..!!
ਤੇਰੇ ਕੋਲ ਮੇਰੇ ਜਿਹੇ ਬੇਸ਼ੱਕ ਲੱਖਾਂ ਹੋਣਗੇ
ਪਰ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਤੇਰੇ ਜਿਹਾ ਬਸ ਤੂੰ ਹੀ ਏ..!!