अब बस लिख के मिटा हम देते हैं, अपने ही शब्दों के जाल को..
क्यूंकि अब डायरी भी समझ नहीं पाती है, मेरे मन में चलते ख्याल को..
अब पन्ने भी मेरी कलम की स्याही से, बस दूर सा होना चाहते हैं..
अब बताएं भी तो आखिर किसे बताएं, अपने इस बिगडते हाल को..
अब बस लिख के मिटा हम देते हैं, अपने ही शब्दों के जाल को..
क्यूंकि अब डायरी भी समझ नहीं पाती है, मेरे मन में चलते ख्याल को..
अब पन्ने भी मेरी कलम की स्याही से, बस दूर सा होना चाहते हैं..
अब बताएं भी तो आखिर किसे बताएं, अपने इस बिगडते हाल को..
shuruaat si yaar sacha lageyaa
galla ton ohdi pyaar sachha lageyaa
hathaa ton usde jehar mitha asi peende rahe
kar v ki sakde si bina ohde sab bekaar jeha lageyaa
ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਸੀ ਯਾਰ ਸੱਚਾ ਲਗਿਆਂ
ਗਲਾਂ ਤੋਂ ਓਹਦੀ ਪਿਆਰ ਸੱਚਾ ਲਗਿਆਂ
ਹਥਾਂ ਤੋਂ ਓਸਦੇ ਜ਼ੈਹਰ ਮਿਠਾ ਅਸੀਂ ਪਿੰਦੇ ਰਹੇ
ਕਰ ਵੀ ਕੀ ਸਕਦੇ ਸੀ ਬਿਨਾਂ ਓਹਦੇ ਸਬ ਬੇਕਾਰ ਜਿਹਾਂ ਲਗਿਆਂ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ
ना हुस्न से, ना सूरत से, ना तेरी अदाओं से दिल बेचैन है…
तेरे जिस्म का घायल करने वाला हिस्सा, तो सिर्फ़ तेरे नैन हैं..
देखा जो तूने, लगा लहरों पे चलती, ठंडी हवाओं का झोंका है..
क्या समझ इस इशारे में, कुछ था, या मेरी नजरों का धोखा है..
अब ना दिन में चैन है, ना रातों को सुकून मिलता है..
क्या तुझे लगता है, के किसी रांझे से मेरा खून मिलता है..??
अब तू ही सुलझा ये गुत्थी, जो मेरे ज़हन में चल रही है..
क्या ये आग ठीक है, प्यार की, जो मेरे सीने में जल रही है..?