अब बस लिख के मिटा हम देते हैं, अपने ही शब्दों के जाल को..
क्यूंकि अब डायरी भी समझ नहीं पाती है, मेरे मन में चलते ख्याल को..
अब पन्ने भी मेरी कलम की स्याही से, बस दूर सा होना चाहते हैं..
अब बताएं भी तो आखिर किसे बताएं, अपने इस बिगडते हाल को..
अब बस लिख के मिटा हम देते हैं, अपने ही शब्दों के जाल को..
क्यूंकि अब डायरी भी समझ नहीं पाती है, मेरे मन में चलते ख्याल को..
अब पन्ने भी मेरी कलम की स्याही से, बस दूर सा होना चाहते हैं..
अब बताएं भी तो आखिर किसे बताएं, अपने इस बिगडते हाल को..
Chehra dekh kar nahi jaan paoge haqeeqat meri..
Kahi pathar kahi moti to kahi aayina hu mein…!!😊
चेहरा देख कर नही जान पाओगे हक़ीक़त मेरी….
कहीं पत्थर कहीं मोती तो कहीं आईना हूँ मैं…!!😊
कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम,
आज वो रिश्ते यूँ रुसवा हो गए |
मेरी होंठो पे हंसी देखेंगे हर दम,
कहने वाले आज बेगाने हो गए|
आँखों में खुशियों की चमक देने वाले,
आज उदासी का आलम दे गए |
छोटी – सी बात का तल्ख क्यूँ इतना,
प्यार के वादे का हर जुमला झूठे हो गए |
इश्क में जला करते थे जो दिन – रात,
अब वो परवाने नफ़रत में जल गए |
हो जाती सुलह माफ़ी दिल में रखने से,
वो तो अपनी जिद के पैमाने हो गए|
हार में ही होती है, मुहब्बत की जीत
जीतने की जुस्तजू में वो जुदा हो गए |
दिल धड़कता था जिसके लिए हर पल,
वो दिल अब खौफजदा हो गए|
पहुंच जाते थे मेरी खामोशी में जो मुझ तक,
वही आज लफ्जों में अलविदा कह गए||