अब बस लिख के मिटा हम देते हैं, अपने ही शब्दों के जाल को..
क्यूंकि अब डायरी भी समझ नहीं पाती है, मेरे मन में चलते ख्याल को..
अब पन्ने भी मेरी कलम की स्याही से, बस दूर सा होना चाहते हैं..
अब बताएं भी तो आखिर किसे बताएं, अपने इस बिगडते हाल को..
अब बस लिख के मिटा हम देते हैं, अपने ही शब्दों के जाल को..
क्यूंकि अब डायरी भी समझ नहीं पाती है, मेरे मन में चलते ख्याल को..
अब पन्ने भी मेरी कलम की स्याही से, बस दूर सा होना चाहते हैं..
अब बताएं भी तो आखिर किसे बताएं, अपने इस बिगडते हाल को..
Udhde khuaban nu bunan te lagga
Shudaai dil te zor na koi..!!
Zehan tere ch kahe aadat ban vassna
Ke tere bina esnu hor na koi..!!
ਉੱਧੜੇ ਖ਼ੁਆਬਾਂ ਨੂੰ ਬੁਣਨ ਤੇ ਲੱਗਾ
ਸ਼ੁਦਾਈ ਦਿਲ ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਨਾ ਕੋਈ..!!
ਜ਼ਹਿਨ ਤੇਰੇ ‘ਚ ਕਹੇ ਆਦਤ ਬਣ ਵੱਸਣਾ
ਕਿ ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਇਸਨੂੰ ਹੋਰ ਨਾ ਕੋਈ..!!
मेरी ज़िन्दगी में तुम शामिल हो एसे,
मंदिर के दरवाजे पर मन्नत के धागे हो जैसे..!❤️