लिखना था कि
खुश हैं तेरे बगैर भी यहां हम,
मगर कमबख्त…
आंसू हैं कि कलम से
पहले ही चल दिए।
लिखना था कि
खुश हैं तेरे बगैर भी यहां हम,
मगर कमबख्त…
आंसू हैं कि कलम से
पहले ही चल दिए।
Gazab di himmat diti hai us rab ne mainu
oh dagabaji kari jande ne
te asi wafadaari kari jaande haan
ਗ਼ਜ਼ਬ ਦੀ ਹਿੰਮਤ ਦਿੱਤੀ ਹੈ ਉਸ ਰੱਬ ਨੇ ਮੈਨੂੰ..
ਉਹ ਦਗਾਬਾਜੀ ਕਰੀ ਜਾਂਦੇ ਨੇ,
ਤੇ ਅਸੀਂ ਵਫ਼ਾਦਾਰੀ ਕਰੀ ਜਾਂਦੇ ਹਾਂ….!!!
तेरा ईश्क रहता है , मेरे सपनों के शहर में ।
दबी जुबां में मुझसे , एक बात कहता है ।।
मन में बसी है तू , दिल तुझसे मिलने को बेकरार है ।
नाराजगी छोड़ दे ना , तेरा प्यार तो मेरे लहू में बहता है ।।
ख्वाबों की गलियों में , बसी चाहत है सनम ।
फितूरी का खुमार भी , बस तेरा ही नाम कहता है ।।
आँखों में नींद नहीं , सुकून में भी चैन नहीं ।
बस इजहार-ए-मोहब्बत का ख्याल , हर पल मेरे जहन में रहता है ।।