लो आज महफिल सजी हैं हमारे लिए
सुनने को मुझे तैयार हर कोई है
पर दिल ने इजाजत नहीं दी है अभी
मेरी गजलो का हकदार और कोई है
लो आज महफिल सजी हैं हमारे लिए
सुनने को मुझे तैयार हर कोई है
पर दिल ने इजाजत नहीं दी है अभी
मेरी गजलो का हकदार और कोई है
main apanee chaahaton ka hisaab karane jo beth jaoo,
tum to sirph mera yaad karana bhee na lota sakoge….
मैं अपनी चाहतों का हिसाब करने जो बेठ जाऊ,
तुम तो सिर्फ मेरा याद करना भी ना लोटा सकोगे…
उठे थे हाथ जिनके,
उन्ही दुआओं का असर हूं,
चिराग़ सी हैं नज़रें मेरी
जैसे सुबह की पहली पहर हूं
धूल से ही तो नाता है मेरा
वहीं ठंडी हवाओं में बसर हूं
कलम से शायर कह दो
होंठों से कहर हूं,
ठहरा है दरिया जो किनारे में
वहीं बहता छोटा सा शहर हूं,
मानों तो प्यास मिले
ना मानों तो ज़हर हूं...