Enjoy Every Movement of life!
उठे थे हाथ जिनके,
उन्ही दुआओं का असर हूं,
चिराग़ सी हैं नज़रें मेरी
जैसे सुबह की पहली पहर हूं
धूल से ही तो नाता है मेरा
वहीं ठंडी हवाओं में बसर हूं
कलम से शायर कह दो
होंठों से कहर हूं,
ठहरा है दरिया जो किनारे में
वहीं बहता छोटा सा शहर हूं,
मानों तो प्यास मिले
ना मानों तो ज़हर हूं...
raati supne ch me aapni maut dekhi
tu nazar ni aaeya mainu ron aaeleyaa ch
ਰਾਤੀ ਸੁਪਨੇ ਚ ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਮੌਤ ਦੇਖੀ👀
ਤੂੰ ਨਜ਼ਰ ਨੀ ਆਇਆ ਮੈਨੂੰ ਰੋਣ ਆਲਿਆ ਚ😭
