Lok jo marzi kehn,
lokaan da kam kehna
saadha jo dil kahu
asi ohi karde rehna
ਲੋਕ ਜੋ ਮਰਜ਼ੀ ਕਹਿਣ,
ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਕੰਮ ਕਹਿਣਾ,
ਸਾਡਾ ਜੋ ਦਿਲ ਕਹੁੰ,
ਅਸੀਂ ਉਹੀ ਕਰਦੇ ਰਹਿਣਾ।।
Lok jo marzi kehn,
lokaan da kam kehna
saadha jo dil kahu
asi ohi karde rehna
ਲੋਕ ਜੋ ਮਰਜ਼ੀ ਕਹਿਣ,
ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਕੰਮ ਕਹਿਣਾ,
ਸਾਡਾ ਜੋ ਦਿਲ ਕਹੁੰ,
ਅਸੀਂ ਉਹੀ ਕਰਦੇ ਰਹਿਣਾ।।
Tadap jehi kaale ch uthdi || sacha pyar || shayari
Tadap jehi kalje ch uthdi e mere
Kuj lgda seene cho aar paar ho gaya e
Nain jagde hii rehnde ne raatan nu hun
Kaada chan jehe chehre da didar ho gaya e
Kuj khayalan ch badlaw v on lgga e
Dil v kehne to jiwe Bahr ho gaya e
Khud di halat di vi khabar nahi rehndi menu sajjna
Suneya e loka to k menu pyar ho gaya e
ਤੜਪ ਜੇਹੀ ਕਾਲਜੇ ਚ ਉੱਠਦੀ ਏ ਮੇਰੇ
ਕੁਝ ਸੀਨੇ ਚੋਂ ਜਿਵੇਂ ਆਰ ਪਾਰ ਹੋ ਗਿਆ ਏ..!!
ਨੈਣ ਜਾਗਦੇ ਹੀ ਰਹਿੰਦੇ ਨੇ ਰਾਤਾਂ ਨੂੰ ਹੁਣ
ਕਾਦਾ ਚੰਨ ਜਿਹੇ ਚਿਹਰੇ ਦਾ ਦੀਦਾਰ ਹੋ ਗਿਆ ਏ..!!
ਕੁਝ ਖਿਆਲਾਂ ‘ਚ ਬਦਲਾਵ ਵੀ ਆਉਣ ਲੱਗਾ ਏ
ਦਿਲ ਵੀ ਕਹਿਣੇ ਤੋੰ ਜਿਵੇਂ ਬਾਹਰ ਹੋ ਗਿਆ ਏ..!!
ਖੁਦ ਦੀ ਹਾਲਤ ਦੀ ਵੀ ਖ਼ਬਰ ਨਹੀਂ ਰਹਿੰਦੀ ਮੈਨੂੰ ਸੱਜਣਾ
ਸੁਣਿਆ ਏ ਲੋਕਾਂ ਤੋਂ ਕੇ ਮੈਨੂੰ ਪਿਆਰ ਹੋ ਗਿਆ ਏ..!!
एक बार अकबर और बीरबल बागीचे में बैठे थे। अचानक अकबर ने बीरबल से पूछा कि क्या तुम किसी ऐसे इन्सान को खोज सकते हो जिसमें अलग-अलग बोली बोलने की खूबी हों?
बीरबल ने कहा, क्यों नहीं, मै एक आदमी जानता हूँ जो तोते की बोली बोलता है, शेर की बोली बोलता है, और गधे की बोली भी बोलता है। अकबर इस बात को सुन कर हैरत में पड़ गए। उन्होने बीरबल को कहा किअगले दिन उस आदमी को पेश किया जाये।
बीरबल उस आदमी को अगले दिन सुबह दरबार में ले गए। और उसे एक छोटी बोतल शराब पीला दी। अब हल्के नशे की हालत में शराबी अकबर बादशाह के आगे खड़ा था। वह जानता था की दारू पी कर आया जान कर बादशाह सज़ा देगा। इस लिए वह गिड़गिड़ाने लगा। और बादशाह की खुशामत करने लगा। तब बीरबल बोले की हुज़ूर, यह जो सज़ा के डर से बोल रहा है वह तोते की भाषा है।
उसके बाद बीरबल ने वहीं, उस आदमी को एक और शराब की बोतल पिला दी। अब वह आदमी पूरी तरह नशे में था। वह अकबर बादशाह के सामने सीना तान कर खड़ा हो गया। उसने कहा कि आप नगर के बादशाह हैं तो क्या हुआ। में भी अपने घर का बादशाह हूँ। मै यहाँ किसी से नहीं डरता हूँ।
बीरबल बोले कि हुज़ूर, अब शराब के नशे में निडर होकर यह जो बोल रहा है यह शेर की भाषा है।
अब फिर से बीरबल ने उस आदमी का मुह पकड़ कर एक और बोतल उसके गले से उतार दी। इस बार वह आदमी लड़खड़ाते गिरते पड़ते हुए ज़मीन पर लेट गया और हाथ पाँव हवा में भांजते हुए, मुंह से उल-जूलूल आवाज़ें निकालने लगा। अब बीरबल बोले कि हुज़ूर अब यह जो बोल रहा है वह गधे की भाषा है।
अकबर एक बार फिर बीरबल की हाज़िर जवाबी से प्रसन्न हुए, और यह मनोरंजक उदाहरण पेश करने के लिए उन्होने बीरबल को इनाम दिया।