lokaa di nazaraa ton asi ki laina
asi apni nazraa ch sahi aa
changa taa ithe koi v nai
te saanu maadha kehan wale kai aa
ਲੋਕਾ ਦੀ ਨਜ਼ਰਾਂ ਤੋਂ ਅਸੀਂ ਕੀ ਲੈਣਾ
ਅਸੀਂ ਆਪਣੀ ਨਜ਼ਰਾਂ ਚ ਸਹੀ ਆ
ਚੰਗਾ ਤਾਂ ਇਥੇ ਕੋਈ ਵੀ ਨਹੀਂ
ਤੇ ਸਾਨੂੰ ਮਾੜਾ ਕਹਿਣ ਵਾਲੇ ਕਈ ਆ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ
lokaa di nazaraa ton asi ki laina
asi apni nazraa ch sahi aa
changa taa ithe koi v nai
te saanu maadha kehan wale kai aa
ਲੋਕਾ ਦੀ ਨਜ਼ਰਾਂ ਤੋਂ ਅਸੀਂ ਕੀ ਲੈਣਾ
ਅਸੀਂ ਆਪਣੀ ਨਜ਼ਰਾਂ ਚ ਸਹੀ ਆ
ਚੰਗਾ ਤਾਂ ਇਥੇ ਕੋਈ ਵੀ ਨਹੀਂ
ਤੇ ਸਾਨੂੰ ਮਾੜਾ ਕਹਿਣ ਵਾਲੇ ਕਈ ਆ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ
एक बार अकबर और बीरबल बागीचे में बैठे थे। अचानक अकबर ने बीरबल से पूछा कि क्या तुम किसी ऐसे इन्सान को खोज सकते हो जिसमें अलग-अलग बोली बोलने की खूबी हों?
बीरबल ने कहा, क्यों नहीं, मै एक आदमी जानता हूँ जो तोते की बोली बोलता है, शेर की बोली बोलता है, और गधे की बोली भी बोलता है। अकबर इस बात को सुन कर हैरत में पड़ गए। उन्होने बीरबल को कहा किअगले दिन उस आदमी को पेश किया जाये।
बीरबल उस आदमी को अगले दिन सुबह दरबार में ले गए। और उसे एक छोटी बोतल शराब पीला दी। अब हल्के नशे की हालत में शराबी अकबर बादशाह के आगे खड़ा था। वह जानता था की दारू पी कर आया जान कर बादशाह सज़ा देगा। इस लिए वह गिड़गिड़ाने लगा। और बादशाह की खुशामत करने लगा। तब बीरबल बोले की हुज़ूर, यह जो सज़ा के डर से बोल रहा है वह तोते की भाषा है।
उसके बाद बीरबल ने वहीं, उस आदमी को एक और शराब की बोतल पिला दी। अब वह आदमी पूरी तरह नशे में था। वह अकबर बादशाह के सामने सीना तान कर खड़ा हो गया। उसने कहा कि आप नगर के बादशाह हैं तो क्या हुआ। में भी अपने घर का बादशाह हूँ। मै यहाँ किसी से नहीं डरता हूँ।
बीरबल बोले कि हुज़ूर, अब शराब के नशे में निडर होकर यह जो बोल रहा है यह शेर की भाषा है।
अब फिर से बीरबल ने उस आदमी का मुह पकड़ कर एक और बोतल उसके गले से उतार दी। इस बार वह आदमी लड़खड़ाते गिरते पड़ते हुए ज़मीन पर लेट गया और हाथ पाँव हवा में भांजते हुए, मुंह से उल-जूलूल आवाज़ें निकालने लगा। अब बीरबल बोले कि हुज़ूर अब यह जो बोल रहा है वह गधे की भाषा है।
अकबर एक बार फिर बीरबल की हाज़िर जवाबी से प्रसन्न हुए, और यह मनोरंजक उदाहरण पेश करने के लिए उन्होने बीरबल को इनाम दिया।
naseebon ke khel bhee ajeeb hote hain,
pyaar mein aansoo hee naseeb hote hain,
kaun hona chaahata he apanon se juda,
par aksar bichhadate hain vo jo kareeb hote hain…
नसीबों के खेल भी अजीब होते हैं,
प्यार में आंसू ही नसीब होते हैं,
कौन होना चाहता हे अपनों से जुदा,
पर अक्सर बिछड़ते हैं वो जो करीब होते हैं…