Raat da akhri te swere da pehla zikr e tu…♡
ਰਾਤ ਦਾ ਆਖਰੀ ਤੇ ਸਵੇਰੇ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਜ਼ਿਕਰ ਏ ਤੂੰ…♡
Raat da akhri te swere da pehla zikr e tu…♡
ਰਾਤ ਦਾ ਆਖਰੀ ਤੇ ਸਵੇਰੇ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਜ਼ਿਕਰ ਏ ਤੂੰ…♡
कोई भी जहर को मीठा नहीं बताता है।
कल अपने आप को देखा था माँ की आँखों में
ये आईना हमे बूढ़ा नहीं बताता है।
ए अँधेरे देख ले मुँह तेरा काला हो गया
माँ ने आँखे खोल दी घर में उजाला हो गया।
किस तरह वो मेरे गुनाहो को धो देती है
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।
बुलंदियों का बड़े से बड़ा नीसान छुआ
उठाया गोद में माँ ने तब आसमान छुआ।
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आयी
मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में माँ आयी।
Rabba mainu maar mukaade
Aag la saarde
maithon doori nahi jhali jandi
mainu shamshaan vich swah bna de
ਰੱਬਾ ਮੈਨੂੰ ਮਾਰ ਮੁਕਾਦੇ
ਅੱਗ ਲਾ ਸਾੜਦੇ
ਮੈਥੋਂ ਦੂਰੀ ਨਹੀ ਝੱਲੀ ਜਾਂਦੀ
ਮੈਨੂੰ ਸ਼ਮਸ਼ਾਨ ਵਿੱਚ ਸਵਾਹ ਬਣਾ ਦੇ