Wo khud tumse kuch kahe tabhi kuch maanna zaruri nahi !
Wo tumse kuch na bhi kahe tab bhi sabkuch tum maan hi lena !
वो खुद तुमसे कुछ कहे तभी कुछ मानना ज़रूरी नहीं
वो तुमसे कुछ न भी कहे तब भी सब कुछ तुम मान ही लेना..
Wo khud tumse kuch kahe tabhi kuch maanna zaruri nahi !
Wo tumse kuch na bhi kahe tab bhi sabkuch tum maan hi lena !
वो खुद तुमसे कुछ कहे तभी कुछ मानना ज़रूरी नहीं
वो तुमसे कुछ न भी कहे तब भी सब कुछ तुम मान ही लेना..
तिश्नगी थी मुलाक़ात की,
उस से हाँ मैंने फिर बात की।
दुश्मनी मेरी अब मौत से,
ज़िंदगी हाथ पे हाथ की।
सादगी उसकी देखा हूँ मैं,
हाँ वो लड़की है देहात की।
तुमने वादा किया था कभी,
याद है बात वो रात की।
अब मैं कैसे कहूँ इश्क़ इसे,
बात जब आ गई ज़ात की।
मुझसे क्या दुश्मनी ऐ घटा,
क्यों मेरे घर पे बरसात की।
हमको मालिक ने जितना दिया,
सब ग़रीबों में ख़ैरात की।
तू कभी मिल तो मालूम हो,
क्या है औक़ात औक़ात की।
Ohh bhul ni hone mere ton
Tu beshak bhul jaavin,
Jo din bitaye naal tere
Te raatan chete tere chh lung jaani..
ਤੇਰਾ ਰੋਹਿਤ…✍🏻