
tujhse judi har baat likh raha hu
yeh to log hai jo mujhe “shayar” kehte hai
mai to bas dil ke jazbaat likh raha hu

है इश्क़ तो फिर असर भी होगा
जितना है इधर उधर भी होगा
माना ये के दिल है उस का पत्थर
पत्थर में निहाँ शरर भी होगा
हँसने दे उसे लहद पे मेरी
इक दिन वही नौहा-गर भी होगा
नाला मेरा गर कोई शजर है
इक रोज़ ये बार-वर भी होगा
नादाँ न समझ जहान को घर
इस घर से कभी सफ़र भी होगा
मिट्टी का ही घर न होगा बर्बाद
मिट्टी तेरे तन का घर भी होगा
ज़ुल्फ़ों से जो उस की छाएगी रात
चेहरे से अयाँ क़मर भी होगा
गाली से न डर जो दें वो बोसा
है नफ़ा जहाँ ज़रर भी होगा
रखता है जो पाँव रख समझ कर
इस राह में नज़्र सर भी होगा
उस बज़्म की आरज़ू है बे-कार
हम सूँ का वहाँ गुज़र भी होगा
‘शहबाज़’ में ऐब ही नहीं कुल
एक आध कोई हुनर भी होगा
chal kujh nawaa kita jawe
dard puraaneyaa nu fir seeta jawe
karda rahi hisaab darda da
sajjna nu v taa baad ch kujh fer daseyaa jawe
ਚੱਲ ਕੁਝ ਨਵਾਂ ਕਿੱਤਾ ਜਾਵੇਂ
ਦਰਦ ਪੁਰਾਣਿਆ ਨੂੰ ਫਿਰ ਸਿਤਾ ਜਾਵੇਂ
ਕਰਦਾ ਰਹੀ ਹਿਸਾਬ ਦਰਦਾ ਦਾ
ਸੱਜਣਾ ਨੂੰ ਵੀ ਤਾਂ ਬਾਦ ਚ ਕੁਝ ਫੇਰ ਦੱਸਿਆ ਜਾਵੇ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷