

महंगा लिबास नहीं,
खाली जेब का हिसाब नहीं,
निखारनी है सीरत,
मुझे निखरी सूरत का क्या पता...
खुशियों की छांव नहीं,
ठंडी छांव में पांव नहीं,
मुझे मखमली चादर में सोने का
खिताब क्या पता...
पता है उन सुखी रोटियों की कीमत
जो किसी ने हाथ में थमा दी,
हं, मैं फकीर हूं,
मुझे सोने चांदी की कीमत क्या पता...
Lehje mai teri yeh baat hai…
Jaise koi suhani barsat hai…
Tere tarike ke kayal hai sada…
Yeh kya haseen ehsas hai…❤️
लहजे में तेरी यह बात है…
जैसे कोई सुहानी बरसात है…
तेरे तरीके के कायल है सदा
यह क्या हसीन एहसास है…❤️