Manzil ka naraaz hona bhi zayaz tha..
ham bhi toh ajjnabi raahon se dil lagaa baithe the..
मंजिल का नाराज होना भी जायज था…
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे…
Enjoy Every Movement of life!
Manzil ka naraaz hona bhi zayaz tha..
ham bhi toh ajjnabi raahon se dil lagaa baithe the..
मंजिल का नाराज होना भी जायज था…
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे…
हर सुख दुःख में, साथ साथ जीया करते थे
हार हो या जीत एक दुसरे का हमेशा साथ दिया करते थे
कभी हम तुमसे कभी तुम हमसे रूठ जाया करते थे
फिर हम तुम्हे और कभी तुम हमें मना लिया करते थे
एक दूसरे की खुद से ज्यादा परवाह किया करते थे
ये बात बस कल की ही लगती है
हम तुम अपनी दोस्ती पर कितना इतराया करते थे

Tere gmaan nu lpett me
apni zindagi ch utaar lawa
mulakaat ik fir howe injh
ke ik mulakaat ch me poori zindagi guzaar lawaan