Manzil ka naraaz hona bhi zayaz tha..
ham bhi toh ajjnabi raahon se dil lagaa baithe the..
मंजिल का नाराज होना भी जायज था…
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे…
Manzil ka naraaz hona bhi zayaz tha..
ham bhi toh ajjnabi raahon se dil lagaa baithe the..
मंजिल का नाराज होना भी जायज था…
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे…
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी
Asin tutte taare, ambraan ton ki lainaa
asin tan khud khariyaan de bhandaar
ehna samundraan ton ki laina
ਅਸੀਂ ਟੁਟੇ ਤਾਰੇ, ਅੰਬਰਾਂ ਤੋਂ ਕੀ ਲੈਣਾ
ਅਸੀਂ ਤਾਂ ਖੁਦ ਖਾਰਿਆਂ ਦੇ ਭੰਡਾਰ
ਇਹਨਾਂ ਸਾਮੁੰਦਰਾਂ ਤੋਂ ਕੀ ਲੈਣਾ