Kuch Rasta Likh Dega..
Kuch Main Likh Dunga…
Tum Likhte Jao Mushkil..
Main Manzil Likh Dunga….
Kuch Rasta Likh Dega..
Kuch Main Likh Dunga…
Tum Likhte Jao Mushkil..
Main Manzil Likh Dunga….
कैसे बताऊं तुम्हे के कौन हो तुम…
हवाओं में फैली है जो खुशबू, उसकी सादगी तुम हो…
मेरी रूह को जो ठंडक दे, वो ताज़गी तुम हो…
सज़दा करू मैं किसका, मेरी दुआओं में तुम,
मेरी वफाओं में तुम, बरसती घटाओं में तुम,
बस तुम ही तुम… तुम हो मेरे आज में मेरे कल में भी तुम,
मेरे हर वक्त में तुम, बस तुम ही तुम…
कैसे बताऊं तुम्हे के कौन हो तुम…
ये धड़कने तुम्हारी है,
मेरे दिल की कीमत समझ लेना,
बिछ जाऊं तुम्हारे क़दमों में,
इसे मेरी मन्नत समझ लेना,
तस्वीर मैं भी हूं तुम्हारी,
मुझे अपनी सीरत समझ लेना…
मेरे साए में भी अब दिखते हो तुम,
कैसे बताऊं तुम्हे के कौन हो तुम…
याद उसकी आती हमें,
उसे खबर नहीं मगर।
याद उसकी आती हमें,
वो नसीब में नहीं मगर।
याद उसको करते करते,
मर जायेंगे एक दिन यूंही,
बदनसीब इस दिल का क्या कीजिए,
याद उसकी आती हमें,
उसे बता सकते नहीं मगर।