MARR BHI GAYE JO HUM PYAAR MEIN TERE.
DIL TOH HAMARA RAHEGA TUMHARA.
YAAD TUMHARI HAMESHA AATI RAHEGI,
CHAHE KITNE SUKH DUKH AAYE ZINDAGI MEIN MERI.
MARR BHI GAYE JO HUM PYAAR MEIN TERE.
DIL TOH HAMARA RAHEGA TUMHARA.
YAAD TUMHARI HAMESHA AATI RAHEGI,
CHAHE KITNE SUKH DUKH AAYE ZINDAGI MEIN MERI.
Vanvaas mein virah ka dard urmila se pucho,
sita se puchoge to dharm hi btayengi
Prem ka arth radha se pucho,
Rukmani se puchoge to adhikar hi btayengi
Sewa ka mtlb shrawan Kumar se pucho,
Hanuman ji se puchoge to anand hi btayenge
Aur zehar ka swaad shiv ji se pucho,
Meera se puchoge to amrit hi btayegi!!
वनवास में विरह का दर्द उर्मिला से पूछो,
सीता से पूछोगे तो धर्म ही बतायेंगी
प्रेम का अर्थ राधा से पूछो,
रुक्मणि से पूछोगे तो अधिकार ही बतायेंगी
सेवा का मतलब श्रवण कुमार से पूछो,
हनुमान जी से पूछोगे तो आनंद ही बताएंगे
और ज़हर का स्वाद शिव जी पूछो,
मीरा से पूछोगे तो अमृत ही बतायेंगी!!
माथे पे तिलक लगाकर कूद पड़े थे अंग़ारो पे,
माटी की लाज के लिए उनके शीश थे तलवारों पे।
भगत सिंह की दहाड़ के मतवाले वो निर्भर नहीं थे किन्ही हथियारों पे,
अरे जब देशहित की बात आए तो कभी शक ना करो सरदारों पे॥
आज़ादी की थी ऐसी लालसा की चट्टानों से भी टकरा गये,
चंद आज़ादी के रणबाँकुरो के आगे लाखों अंग्रेज मुँह की खा गये।
विद्रोह की हुंकार से गोरों पे मानो मौत के बादल छा गये,
अरे ये वही भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव है जिनकी बदौलत हम आज़ादी पा गये॥
आज़ादी मिली पर इंक़लाब की आग में अपने सब सुख-दुःख वो भूल गये,
जननी से बड़ी माँ धरती जिसकी ख़ातिर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु झूल गये॥
अब राह तक रही उस माँ को कौन जाके समझाएगा,
कैसे बोलेगा उसको की माँ अब तेरा लाल कभी नहीं आएगा।
बस इतना कहूँगा कि धन्य हो जाएगा वो आँचल जो भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु सा बेटा पाएगा,
क्योंकि इस माटी का हर कण और बच्चा-बच्चा उसे अपने दिल में बसाएगा॥