मत पूछ शीशे से उसके टूटने की वजह,
उसने भी मेरी तरह किसी पत्थर को अपना समजा होगा….
mat poochh sheeshe se usake tootane kee vajah,
usane bhee meree tarah kisee patthar ko apana samaja hoga….
मत पूछ शीशे से उसके टूटने की वजह,
उसने भी मेरी तरह किसी पत्थर को अपना समजा होगा….
mat poochh sheeshe se usake tootane kee vajah,
usane bhee meree tarah kisee patthar ko apana samaja hoga….
Kuch Rasta Likh Dega..
Kuch Main Likh Dunga…
Tum Likhte Jao Mushkil..
Main Manzil Likh Dunga….
हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..