Maturity is deleting the entire paragraph and texting back “oky”✌
Enjoy Every Movement of life!
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कड़ी धूप हो या हो शीतकाल,
हल चलाकर न होता बेहाल.
रिमझिम करता होगा सवेरा,
इसी आस में न रोकता चाल.
खेती बाड़ी में जुटाता ईमान,
महान पुरूष हैं, है वो किसान.
छोटे-छोटे से बीज बोता,
वही एक बड़ा खेत होता.
जिसकी दरकार होती उसे,
बोकर उसे वह तभी सोता.
खेतो का कण-कण हैं जिसकी जान,
महान पुरूष है, है वो किसान.
तरुण चौधरी
निंद मेरी ख्वाब तुम्हारा आये ये भी कोई बात है ,
तुम्हारे याद के बिना सो जाऊ वो भी कोई रात है ..
Nind meri khwab tumhare aaye ye bhi koi baat hai
Tumhare yaad ke Bina so jau vo bhi koi raat hai…